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चौघड़िया देखना क्यों आवश्यक है?

हिन्दू संस्कृति में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करने से पहले शुभ मुहूर्त का चयन करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। यह मान्यता केवल धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहन ज्योतिषीय तर्क भी मौजूद हैं। प्रत्येक कार्य तभी सफल होता है जब समय, ग्रह और ऊर्जा हमारे सहयोग में हों। गलत समय में शुरू किया गया कार्य बाधाओं, देरी और असफलता की ओर भी ले जा सकता है।

Choghadiya Muhurat इसी समय-चयन की प्राचीन और सरल विधि है। जब किसी भी कारण से सम्पूर्ण पंचांग देखकर शुभ मुहूर्त निकालना सम्भव न हो, तब चौघड़िया देखकर भी कार्य का आरम्भ किया जा सकता है। यही कारण है कि यात्रा, विवाह की बातचीत, नया कारोबार आरम्भ, खरीदारी, पूजा-पाठ, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और लेन-देन जैसे तमाम कार्यों के लिए चौघड़िया देखना आवश्यक माना जाता है।

तो इन्हीं सब बातों को लेकर हम आज के विषय का श्री गणेश करते हैं; नमस्ते! Anything that makes you feel connected to me — hold on to it. मैं Aviral Banshiwal, आपका दिल से स्वागत करता हूँ|🟢🙏🏻🟢

चौघड़िया क्या होती है?

चौघड़िया हिन्दू पंचांग में मुहूर्त निर्धारण की एक महत्वपूर्ण पद्धति है। ‘चौघड़िया’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है — चौ (चार) + घड़िया (घटी/समयखंड) अर्थात ऐसा समयखंड जिसमें चार घटियाँ हों। प्राचीन काल में समय की गणना पल और घटी के आधार पर की जाती थी। एक घटी लगभग 24 मिनट की होती है, इसलिए चार घटियों का समय लगभग 96 मिनट (1 घंटा 36 मिनट) माना जाता है।

चौघड़िया का उपयोग विशेष रूप से तब किया जाता है जब कोई शुभ कार्य अचानक करना हो और विस्तृत पंचांग देखने का समय न हो। इस समय प्रणाली में दिन और रात — दोनों के समय को 8-8 चौघड़ियों (मुहूर्तों) में विभाजित किया जाता है और प्रत्येक मुहूर्त को एक ग्रह का स्वामित्व प्राप्त होता है।

दिन और रात की चौघड़िया कैसे विभाजित होती है?

चौघड़िया प्रणाली पूरी तरह सूर्योदय और सूर्यास्त पर आधारित है। इसलिए दिन और रात में चौघड़िया की गणना अलग-अलग होती है।

भारतीय समय गणना के अनुसार —

  • सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय — दिन
  • सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक — रात

इस प्रकार दिन व रात के समय को 8-8 समान भागों में विभाजित किया जाता है। हर भाग चौघड़िया कहलाता है और उसकी अवधि होती है:

⏱️ 1 चौघड़िया = लगभग 96 मिनट (1 घंटा 36 मिनट)
या
⏱️ 1 चौघड़िया = 4 घटी

इस प्रकार:

  • दिन में 8 चौघड़ियाँ
  • रात में 8 चौघड़ियाँ
    कुल मिलाकर 24 घंटे में 16 चौघड़ियाँ होती हैं।

🔹 दिन की चौघड़िया

सूर्योदय से शुरू → सूर्यास्त पर समाप्त
हर दिन की पहली चौघड़िया उस दिन के वार स्वामी ग्रह की होती है।
जैसे:

  • सोमवार → चंद्र ग्रह → पहली चौघड़िया = अमृत
  • मंगलवार → मंगल ग्रह → पहली चौघड़िया = रोग
  • बुधवार → बुध ग्रह → पहली चौघड़िया = लाभ

आदि…

🔹 रात की चौघड़िया

सूर्यास्त से शुरू → अगले दिन सूर्योदय तक रात की चौघड़ियों का कारक ग्रह क्रम दिन की अपेक्षा भिन्न होता है और यह भी पूरी तरह स्थिर रहता है।

📌 ध्यान रखने योग्य

  • दिन के समय की शुभ-अशुभ चौघड़ियाँ रात में नहीं मानी जातीं
    (उदाहरण: रात में रोग या काल का प्रभाव उतना घातक नहीं)
  • स्थान के अनुसार सूर्योदय–सूर्यास्त बदलते हैं
    इसलिए चौघड़िया की वास्तविक अवधि भी बदल सकती है

चौघड़िया मुहूर्त क्या है?

चौघड़िया मुहूर्त वह विशेष समयखंड है जिसमें ग्रहों की स्थिति हमारे पक्ष में होती है और जिस समय किसी शुभ कार्य को प्रारम्भ करने पर सफलता मिलने की संभावना अधिक रहती है। प्रत्येक चौघड़िया एक ग्रह के प्रभाव में होती है और ग्रह की प्रकृति के अनुसार वह समय शुभ या अशुभ फल प्रदान करता है। चौघड़िया मुहूर्त दिनरात के अलग-अलग समयों पर आधारित होते हैं। इनका क्रम निश्चित है और हर सप्ताह के दिन (वार) के अनुसार बदलता है। उदाहरण के लिए:

  • सोमवार का पहला मुहूर्त हमेशा अमृत होगा
  • मंगलवार का पहला मुहूर्त हमेशा रोग होगा

इस प्रकार वार का स्वामी ग्रह जिस चौघड़िया का स्वामी होता है, उसी चौघड़िया से उस दिन का क्रम शुरू होता है।

🔹 चौघड़िया की प्रकृति

चौघड़िया को मुख्यतः शुभ और अशुभ श्रेणियों में बाँटा गया है:

श्रेणीमुहूर्त के नामस्वामी ग्रहउपयोग
शुभअमृत, शुभ, लाभ, चलचंद्र, बृहस्पति, बुध, शुक्रकिसी भी शुभ कार्य का आरम्भ
अशुभरोग, काल, उद्वेगमंगल, शनि, सूर्यनए कार्य में बाधा, असफलता

🧿 अचानक शुभ कार्य के लिए अत्यंत उपयोगी

अगर:

  • विवाह संवाद तय हो
  • घर/दुकान में प्रवेश
  • व्यापार/शेयर लेन-देन
  • यात्रा आरम्भ
  • वाहन या महंगी वस्तु खरीद

और पूर्ण मुहूर्त निकालना संभव न हो, तो केवल चौघड़िया देखकर ही सही समय चुन सकते हैं ✅

🔍 सरलता यही आकर्षण है

जहाँ पंचांग के 5 अंग — (तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण) का गणित जटिल लगता है, वहीं चौघड़िया मात्र समय आधारित है, इसीलिए: सामान्य व्यक्ति भी बिना ज्योतिष ज्ञान के इसे देख सकता है।

उद्वेग मुहूर्त — सूर्य ग्रह का समय

उद्वेग शब्द का अर्थ है — चिंता, तनाव, उलझन; इस मुहूर्त का स्वामी ग्रह सूर्य है और इसे अशुभ मुहूर्त माना गया है। इस दौरान आरम्भ किए गए कार्य में मानसिक असंतोष, विवाद या प्रशासनिक अड़चनें आ सकती हैं।

❌ इस मुहूर्त में क्या न करें?

  • किसी नए शुभ कार्य का प्रारम्भ
  • प्रेम, परिवार या समाज से जुड़े योजनाएँ
  • ज़रूरी दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर
  • नए व्यापार की शुरुआत

कब उपयोग करें?

  • सरकारी कार्य से संबंधित प्रार्थना-पत्र देना
  • कोर्ट-कचहरी की अधूरी फाइल आगे बढ़ाना
  • प्रशासनिक समस्याओं का निपटान
  • सरकारी शिकायतों का समाधान

मतलब: जहाँ राजसत्ता या अधिकार का हस्तक्षेप हो,
वहाँ उद्वेग मुहूर्त ठीक माना जाता है ✅

लाभ मुहूर्त — बुध ग्रह का समय

लाभ शब्द का अर्थ है — फायदा, उन्नति, प्राप्ति; इस मुहूर्त का स्वामी ग्रह बुध है। इसे बहुत शुभ चौघड़िया माना जाता है, क्योंकि बुध बुद्धि, वाणी, व्यापार और संचार का कारक ग्रह है। इस समय किया गया कार्य सफलता, सुखद परिणाम और लाभ प्रदान करता है। यह विशेष रूप से व्यापार, शिक्षा और सौदेबाज़ी से जुड़े कार्यों के लिए उत्तम है।

इस मुहूर्त में क्या करें?

  • व्यापारिक लेन-देन
  • नया व्यवसाय शुरू करना
  • पैसे का निवेश
  • नौकरी, इंटरव्यू, ज्वाइनिंग
  • पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षा से जुड़े कार्य
  • दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर
  • मार्केटिंग, विज्ञापन, प्रमोशन कार्य

❌क्या न करें?

  • बड़े भावनात्मक निर्णय
  • स्वास्थ्य संबंधी नई शुरुआत (जैसे सर्जरी तय करना)

📌 व्यवसायियों के लिए सर्वश्रेष्ठ

यदि अचानक कोई डील या लाभ का अवसर मिले
और समय देखने का मौका कम हो —
तो लाभ मुहूर्त देखकर ही कदम उठाएँ ✅

लाभ मुहूर्त = पैसे + बुद्धि + सफलता का मेल

चल मुहूर्त — शुक्र ग्रह का समय

चल शब्द का अर्थ है — गतिशील, आगे बढ़ने वाला, प्रगति देने वाला; इस मुहूर्त का स्वामी ग्रह शुक्र है, जो सौंदर्य, भोग-विलास, वाहन, वैवाहिक सुख और कलात्मक प्रतिभा का कारक है। इस मुहूर्त में किया गया कार्य आगे बढ़ता है, रुकता नहीं — इसीलिए इसे विशेष रूप से यात्रा और नए प्रयासों के लिए शुभ माना गया है ✅

✅ इस मुहूर्त में क्या करें?

  • यात्रा प्रारम्भ करना (किसी भी दिशा में)
  • वाहन खरीदना / उसका शुभारंभ
  • विवाह/रिश्ता बातचीत से जुड़े कार्य
  • कला, संगीत, फिल्म, डिजाइन संबंधित कार्य
  • घर/ऑफिस की सजावट से जुड़े काम
  • सोशल मीडिया, विज्ञापन, प्रमोशन

❌ सावधानी

  • बड़े कानूनी/कोर्ट मामलों की शुरुआत न करें
  • अत्यधिक भावनात्मक निर्णय से बचें

🌟 यात्रा के लिए क्यों श्रेष्ठ?

शुक्र ग्रह आनंद, सुविधा और सुरक्षा का प्रतीक है, इसलिए चल मुहूर्त में शुरू की गई यात्रा —

  • सफल होती है
  • बाधाएँ कम आती हैं
  • लक्ष्य आसानी से प्राप्त होता है

संक्षेप में —
कदम बढ़ाने वाले हर काम के लिए चल मुहूर्त बेस्ट!

रोग मुहूर्त — मंगल ग्रह का समय

‘रोग’ का अर्थ है — बीमारी, बाधा, शारीरिक कष्ट, इस मुहूर्त का स्वामी ग्रह मंगल है, जो अग्नि, चोट, दुर्घटना, क्रोध और संघर्ष का कारक माना जाता है। इसीलिए यह मुहूर्त नए कार्यों और स्वास्थ्य संबंधी शुरुआत के लिए अशुभ माना गया है।

इस मुहूर्त में क्या न करें?

  • पहली बार डॉक्टर/अस्पताल जाना
    (अगर आपात स्थिति न हो)
  • नई बीमारी का इलाज शुरू करना
  • सर्जरी, ऑपरेशन
  • लड़ाई-झगड़े या कानूनी वार्ता
  • विवाह, गृहप्रवेश, सौदा, सगाई

मंगल का प्रभाव शारीरिक हानि, रक्तपात या विवाद बढ़ा सकता है ❌

इस मुहूर्त में क्या करें?

  • पहले से चल रहे इलाज को जारी रखना
    (नया आरम्भ न हो)
  • संघर्षपूर्ण कार्य जिन्हें पूरा करना आवश्यक हो
  • ऊर्जा और साहस की आवश्यकता वाले कार्य

यानी अधूरे, बाधा वाले कार्य इस समय में निपटाना लाभकारी हो सकता है ✅

🧠 मनोवैज्ञानिक प्रभाव

इस दौरान व्यक्ति:

  • अधिक उत्तेजित
  • जल्दी गुस्सा होने वाला
  • हठी हो सकता है

इसलिए शांत रहकर ही कोई कदम बढ़ाएँ।

शुभ मुहूर्त — बृहस्पति ग्रह का समय

‘शुभ’ का शाब्दिक अर्थ है — मंगलकारी, सौभाग्य देने वाला, इस मुहूर्त का स्वामी ग्रह बृहस्पति (गुरु) है, जो ज्ञान, धर्म, समृद्धि और आशीर्वाद का प्रतीक है। इसलिए यह मुहूर्त हर प्रकार के धार्मिक, सांस्कृतिक और मांगलिक कार्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

बृहस्पति की सकारात्मक ऊर्जा इस दौरान किए गए कार्यों में
❇️ सफलता
❇️ सम्मान
❇️ और स्थायी सुख
प्रदान करती है।

इस मुहूर्त में क्या करें?

  • पूजा, हवन, यज्ञ जैसे धार्मिक कार्य
  • विवाह, सगाई, गृहप्रवेश
  • नया व्यवसाय, दुकान उद्घाटन
  • महत्वपूर्ण सौदों पर हस्ताक्षर
  • धन निवेश, दीर्घकालिक योजनाएँ
  • नौकरी ज्वाइनिंग, उच्च शिक्षा का आरम्भ
  • नई वस्तु/वाहन खरीदना

गुरु ग्रह विकास और विस्तार देता है
इसलिए इस समय शुरू हुए कार्य लंबे समय तक अच्छा फल देते हैं

✖️ क्या न करें?

  • विवादित कार्य
  • छल-कपट या अनैतिक गतिविधियाँ

क्योंकि गुरु धर्म और सत्य का प्रतिनिधि है
ऐसे कार्यों का फल उल्टा भी लौट सकता है ❌

🌟 विशेष महत्व

  • जिस कार्य में आशीर्वाद, प्रतिष्ठा, धन और स्थिरता चाहिए —
    शुभ मुहूर्त सबसे उत्कृष्ट विकल्प है।

काल मुहूर्त — शनि ग्रह का समय

‘काल’ शब्द का अर्थ है — विघ्न, कठिनाई, अवरोध और इस मुहूर्त का स्वामी ग्रह शनि है, जो कर्मफल, देरी, परेशानी और संघर्ष का प्रतीक माना जाता है। इसलिए इस समय में कोई भी नया कार्य प्रारम्भ करने से —

  • बाधाएँ आ सकती हैं
  • कार्य रुक सकता है
  • देरी या असफलता मिल सकती है

✖️ इस मुहूर्त में क्या न करें?

  • नया व्यवसाय या नई योजना
  • पैसे का भारी लेन-देन
  • विवाह, शुभ कार्यक्रम
  • यात्रा की शुरुआत
  • महंगी वस्तु की खरीद

नए कार्य में देरी और बाधा का भय अधिक रहता है ❌

इस मुहूर्त में क्या करें?

  • पुराने/अधूरे कार्यों को पूरा करना
  • मरम्मत का काम, सफाई, सुधार
  • अपने कर्मों का मूल्यांकन
  • दान-पुण्य, सेवा या परोपकार

शनि सेवा और निस्वार्थ कर्म का प्रतिनिधि है
इसलिए भलाई के कार्य इस समय शुभ फल देते हैं ✅

📌 व्यवहार में उपयोग

यदि कोई काम पहले से अटका हो या लंबे समय से पेंडिंग हो
तो काल मुहूर्त उसे पूरा करने के लिए उपयुक्त माना जाता है।

अमृत मुहूर्त — चंद्र ग्रह का समय

‘अमृत’ का अर्थ है — अजर-अमर, पूर्ण सफलता देने वाला, अमूल्य और इस मुहूर्त का स्वामी ग्रह चंद्र है, जो मन, शांति, प्रेम, सौम्यता, सुख और समृद्धि का ग्रह है। इसी कारण यह मुहूर्त सभी शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस दौरान किए गए कार्य में सफलता, उन्नति, सौभाग्य और मानसिक संतोष की प्राप्ति होती है ✅

इस मुहूर्त में क्या करें?

  • विवाह, सगाई, गृह प्रवेश
  • नया कारोबार, दुकान या ऑफिस की शुरुआत
  • धन, वाहन या संपत्ति खरीद
  • यात्रा, विशेषकर तीर्थ यात्रा
  • पढ़ाई, परीक्षा में प्रवेश, ज्ञानार्जन
  • नया कार्य या प्रोजेक्ट प्रारम्भ
  • महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर हस्ताक्षर
  • किसी भी प्रकार का शुभ संस्कार

अमृत = सफलता + सुख + समृद्धि
यानी अमृत मुहूर्त में किया गया कार्य अमृत फल देता है 🌟

✖️ इस मुहूर्त में क्या न करें?

  • नकारात्मक, अनैतिक या छलपूर्ण कार्य
    (फल प्रतिकूल भी हो सकता है)

🌙 चंद्र का प्रभाव

यह मुहूर्त मन को:

  • शांत
  • सकारात्मक
  • आत्मविश्वासी
    बनाता है ✅

जिससे कार्य सुचारू रूप से आगे बढ़ते हैं।

मुहूर्तग्रह स्वामीस्वभावकब करेंकब न करें
उद्वेगसूर्यअशुभराजकार्य की फाइलशुभ शुरुआत
लाभबुधअत्यंत शुभव्यापार, शिक्षाभावनात्मक निर्णय
चलशुक्रशुभयात्राकानूनी शुरुआत
रोगमंगलअशुभपुराने इलाज जारीनया इलाज
शुभगुरुअत्यंत शुभपूजा, विवाहअनैतिक कार्य
कालशनिअशुभअधूरा काम पूरानया कार्य
अमृतचंद्रसर्वोत्तम शुभसभी शुभ कार्यबुरे कार्य

किस दिन कौनसा मुहूर्त कब से कब तक?

चौघड़िया का क्रम वार के ग्रह स्वामी के अनुसार शुरू होता है। दिन में 8 चौघड़ियाँ और रात में भी 8 चौघड़ियाँ होती हैं। यह क्रम हर सप्ताह दोहराया जाता है यानी स्थिर (Fixed) रहता है ✅

🌞 दिन की चौघड़िया तालिका

(यदि सूर्योदय — 6:00 AM मान लिया जाए)

⏱️ प्रत्येक चौघड़िया = लगभग 1 घंटा 30 मिनट
(सूर्योदय के समय के अनुसार आगे-पीछे होगा)

वार 👇12345678
समय 👉06 – 7:30 AM7:30 – 9 AM9 – 10:30 AM10:30 – 12 AM12 – 1:30 PM1:30 – 3 PM3 – 4:30 PM4:30 – 6 PM
रविवारउद्वेगचर (चल)लाभअमृतकालशुभरोगउद्वेग
सोमवारअमृतकालशुभरोगउद्वेगचरलाभअमृत
मंगलवाररोगउद्वेगचरलाभअमृतकालशुभरोग
बुधवारलाभ अमृत काल शुभ रोग उद्वेग चल लाभ
गुरुवारशुभ रोग उद्वेग चल लाभ अमृत काल शुभ
शुक्रवारचर (चल)लाभअमृतकालशुभरोगउद्वेगचर
शनिवारकालशुभरोगउद्वेगचरलाभअमृतकाल

🌙 रात की चौघड़िया तालिका

(यदि सूर्यास्त — 6:00 PM मान लिया जाए)

वार 👇12345678
समय 👉6 – 7:30 PM7:30 – 9 PM9 – 10:30 PM10:30 – 12 PM12 – 1:30 AM1:30 – 3 AM3 – 4:30 AM4:30 – 6 AM
रविवारशुभअमृतचररोगकाल लाभ उद्वेग शुभ
सोमवारचर रोग काल लाभ उद्वेग शुभ अमृत चर
मंगलवारकाललाभ उद्वेग शुभ अमृत चर रोग काल
बुधवारउद्वेगशुभ अमृत चर रोग काल लाभ उद्वेग
गुरुवारअमृतचररोगकाल लाभ उद्वेग शुभ अमृत
शुक्रवाररोग काल लाभ उद्वेग शुभ अमृत चर रोग
शनिवार लाभ उद्वेग शुभ अमृत चर रोग काल लाभ

वार वेला, काल वेला और कालरात्रि क्या होती हैं?

चौघड़िया की तरह ही ज्योतिष शास्त्र में दिन और रात के कुछ विशेष समय ऐसे भी माने गए हैं जिनमें शुभ कार्य करना उचित नहीं होता। इन अशुभ समयों में प्रमुख हैं — वार वेला, काल वेला और कालरात्रि। वार वेला और काल वेला दोनों केवल दिन के समय ही प्रभावी होते हैं। वार वेला उस समय को कहते हैं जिसमें उस दिन के वार का स्वामी ग्रह अपना अशुभ प्रभाव डालता है।

उदाहरण के लिए, सोमवार चंद्र ग्रह का दिन है, तो सोमवार की वार वेला में चंद्र का प्रभाव शुभ नहीं माना जाता। वहीं काल वेला शनि ग्रह के प्रभाव से जुड़ी मानी गई है, इसलिए इस समय में कार्यों में रुकावट, देरी और अपेक्षित परिणामों की प्राप्ति में कठिनाई देखी जा सकती है। इन दोनों समयों में विवाह, गृह-प्रवेश, नया व्यवसाय शुरू करने, बड़े सौदों के निर्णय लेने या यात्रा आरम्भ करने से बचना चाहिए।

इसी प्रकार कालरात्रि रात का अशुभ समय माना जाता है। इस समय नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय होती है और मनुष्य की निर्णय क्षमता प्रभावित हो सकती है। रात्रि में ग्रहों के कई सकारात्मक प्रभाव कमज़ोर पड़ जाते हैं, जिससे इस अवधि में आरम्भ किए गए शुभ कार्य बाधाओं से घिर सकते हैं। इसलिए कालरात्रि में धन और मूल्यवान वस्तुओं का खरीदना, बड़े निर्णय लेना, यात्राएँ शुरू करना और किसी भी मांगलिक कार्य की शुरुआत करना उचित नहीं माना जाता। हाँ, यदि कोई अत्यावश्यक परिस्थिति हो तो रात्रि के शुभ मुहूर्त — जैसे लाभ या अमृत — का विचार करने के बाद ही निर्णय लेना चाहिए।

संक्षेप में, वार वेला, काल वेला और कालरात्रि — तीनों ही समय ऐसे होते हैं जिनमें ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी भी शुभ कार्य या भविष्य-निर्माण से संबंधित निर्णय को टाल देना सबसे अच्छा माना गया है। शुभ कार्य तभी किए जाने चाहिए जब ग्रह सकारात्मक ऊर्जा प्रदान कर रहे हों।

दिन में वार वेला और काल वेला

समय👇 – दिन👉रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरुवार शुक्रवार शनिवार
6 – 7:30 AMकाल वेला
7:30 – 9 AMकाल वेला वार वेला
9 – 10:30 AMकाल वेला वार वेला
10:30 – 12 AMवार वेला काल वेला
12 – 1:30 PMकाल वेला वार वेला
1:30 – 3 PMकाल वेला वार वेला
3 – 4:30 PM वार वेला काल वेला
4:30 – 6 PMवार वेला काल वेला

कालरात्रि का समय

समय👇 – दिन👉रविवारसोमवारमंगलवारबुधवारगुरुवारशुक्रवारशनिवार
6 – 7:30 PMकालरात्रि
7:30 – 9 PMकालरात्रि
9 – 10:30 PMकालरात्रि
10:30 – 12 PMकालरात्रि
12 – 1:30 AMकालरात्रि
1:30 – 3 AMकालरात्रि
3 – 4:30 AMकालरात्रि
4:30 – 6 AMकालरात्रि

राहुकाल क्या होता है? क्यों अशुभ माना गया है?

राहु काल ज्योतिष के अनुसार दिन का वह समय होता है जिसमें राहु ग्रह का प्रभाव सबसे अधिक सक्रिय माना जाता है। राहु एक छाया ग्रह है जिसका स्वभाव भ्रम, विलंब, अनिश्चितता, धोखे, हानि और मानसिक अस्थिरता देने वाला होता है। इसी कारण राहुकाल के दौरान कोई शुभ या महत्वपूर्ण कार्य आरम्भ करना अशुभ माना गया है। ऐसा माना जाता है कि इस अवधि में शुरू किया गया कार्य विघ्नों से घिर सकता है, सफलता देर से मिल सकती है या मनचाहे परिणाम न मिलें।

राहुकाल का विचार केवल दिन के समय किया जाता है, और विशेष रूप से रविवार, मंगलवार और शनिवार को इसका प्रभाव अधिक माना गया है, क्योंकि इन दिनों राहु की नकारात्मक ऊर्जा अधिक प्रबल होती है। रात्रि समय में राहु काल का विचार नहीं किया जाता क्योंकि रात में राहु की ग्रह-शक्ति उतनी दुष्प्रभावी नहीं होती। हर दिन राहुकाल का समय स्थिर (फिक्स) होता है — यदि किसी स्थान पर सूर्योदय का समय 6:00 AM माना जाए, तो पूरे सप्ताह इसका समय एक निश्चित क्रम से चलता है जैसे —

दिन समय
रविवार 4:30 – 6 PM
सोमवार 7:30 – 9 AM
मंगलवार 3 – 4:30 PM
बुधवार 12 – 1:30 PM
गुरुवार 1:30 – 3 PM
शुक्रवार 10:30 – 12 AM
शनिवार 9 – 10:30 AM

राहुकाल में:

  • नया व्यवसाय आरम्भ करना
  • पूजन, हवन, गृहप्रवेश, संस्कार
  • यात्रा की शुरुआत
  • महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर
  • सौदा और धन निवेश
    जैसे कार्य बिल्कुल टालने चाहिए

किन्तु यदि कोई पुराना कार्य पहले से चल रहा हो या किसी कार्य की दोबारा शुरुआत करनी हो तो इसे अशुभ नहीं माना जाता। साथ ही, अत्यावश्यक स्थितियों में राहुकाल के प्रभाव को कम करने के लिए ईश्वर का स्मरण, हनुमान चालीसा पाठ या कोई शुभ मंत्र जाप करना शुभ माना गया है। सार यह कि राहुकाल कोई डराने वाली चीज़ नहीं, बल्कि समय का वह संकेत है जो हमें सावधान करता है कि अभी भावनाओं और निर्णयों में भ्रम की संभावना अधिक है, इसलिए शुभ कार्यों को थोड़ी देर के लिए रोक देना ही समझदारी है।

यमगंड काल क्या है? इसे सबसे अधिक अशुभ क्यों माना गया है?

यमगंड काल (या यमघंटक काल) ज्योतिष में दिन का वह समय है जिसमें मृत्यु के देवता ‘यम’ की अशुभ ऊर्जा प्रबल रहती है। यह समय किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अत्यंत प्रतिकूल माना गया है। यदि इस काल में कोई नया कार्य आरम्भ किया जाए तो उसके बाधित होने, असफल होने या दुखद परिणाम मिलने की आशंका अधिक रहती है।

यमगंड काल विशेष रूप से:

  • विवाह/सगाई
  • गृह प्रवेश
  • व्यवसाय की शुरुआत
  • महत्वपूर्ण सौदे
  • यात्रा की शुरुआत
    जैसे मंगलकारी कार्यों के लिए पूर्णतः निषिद्ध माना गया है।

इस समय केवल:

  • श्राद्ध
  • मृतक संबंधी क्रिया
  • तर्पण
    जैसे अंतिम संस्कार या मृत्यु-सम्बंधित अनुष्ठान उचित माने जाते हैं।

🌑 यमगंड काल का निर्धारण कैसे होता है?

यमगंड काल की गणना:

  • प्रत्येक वार (सप्ताह के दिन)
  • उस दिन पर स्थित विशिष्ट नक्षत्र के संयोग
    से होती है।

उदाहरण:

  • रविवार को यदि मघा नक्षत्र हो → यमगंड काल बनेगा
  • सोमवार को विशाखा नक्षत्र → अशुभ प्रभाव बढ़ेगा
    …इसी प्रकार हर दिन अलग नक्षत्र के आधार पर इसका निर्माण होता है।
दिनअशुभ नक्षत्र (यमगंड कारक)
रविवार मघा
सोमवार विशाखा
मंगलवार आर्द्रा
बुधवार मूल
गुरुवार कृतिका
शुक्रवार रोहिणी
शनिवार हस्त

🧊 रात में क्यों प्रभावी नहीं?

रात का काल चंद्र और सौम्य ग्रहों के प्रभाव में अधिक होता है, इसलिए दिन की अपेक्षा यमगंड का नकारात्मक प्रभाव रात्रि में नगण्य माना गया है ✅

📌 सावधानियाँ

  • इस काल में यदि कोई कार्य शुरू करना अनिवार्य हो
    तो उसे शुभ मंत्र/पूजा के बाद ही प्रारम्भ करें
  • यात्रा से पहले हनुमान चालीसा पढ़ना उत्तम माना गया है।

संक्षेप में:

यमगंड काल वह समय है जहाँ प्रारम्भ किया गया शुभ कार्य
सकारात्मक मार्ग पर आगे बढ़ने की जगह
अवरोधों और कठिनाइयों की ओर मुड़ सकता है ❌

गुलिक काल और भद्रा काल क्या होते हैं? (संक्षिप्त परिचय)

चौघड़िया और राहुकाल की तरह ही ज्योतिष में गुलिक काल और भद्रा काल भी ऐसे समय माने जाते हैं, जिनका विचार शुभ कार्य आरम्भ करने से पहले अवश्य किया जाना चाहिए। इन दोनों का प्रभाव अलग-अलग प्रकार का होता है —

🌑 गुलिक काल — शनि का सकारात्मक पक्ष

गुलिक काल शनि ग्रह के उपग्रह ‘गुलिक’ का प्रभावी समय होता है। इसका स्वभाव शनि से प्रभावित होने के कारण कर्म, मेहनत और परिणाम को प्रभावित करता है। यद्यपि शनि को अक्सर अशुभ माना जाता है, लेकिन गुलिक काल को पूरी तरह अशुभ नहीं कहा गया है। इस समय में शुरु किया गया कार्य अक्सर लंबे समय तक चलता है और स्थिरता देता है।

✅ इसलिए यदि किसी कार्य को दीर्घकालिक बनाना हो जैसे —

  • व्यवसाय
  • भवन निर्माण
  • शिक्षा प्रारंभ
    तो गुलिक काल ठीक माना गया है।

लेकिन विवाह, धार्मिक उत्सव या भव्य शुभ कार्य इससे टालना बेहतर है।

🌘 भद्रा काल — अशुभ और जोखिमपूर्ण समय

भद्रा काल, जिसे ‘भद्रा’ या ‘भद्रा योग’ भी कहा जाता है, पंचांग की ‘करण’ प्रणाली से निर्मित होता है। यह समय विशेष रूप से:

  • दुर्घटनाओं
  • विवादों
  • हानि
  • अपशकुन
    की संभावना को बढ़ाता है।

यही कारण है कि:

  • गृह प्रवेश
  • विवाह
  • यात्रा
  • शिलान्यास
    जैसे शुभ कार्य भद्रा में बिल्कुल नहीं किए जाते

केवल:

  • संघर्षपूर्ण कार्य
  • सरकारी प्रकरण
  • शस्त्र प्रशिक्षण
    जैसे कर्म इसमें किए जा सकते हैं।

📌 संक्षिप्त समझ

  • गुलिक काल = दीर्घकालिक कार्यों के लिए उपयुक्त
  • भद्रा काल = सभी शुभ शुरुआत के लिए अशुभ

नोटः
इन दोनों विषयों पर और अधिक विस्तार एक अलग लेख में किया जाना चाहिए, क्योंकि इनकी गणनाएँ, तालिकाएँ और अपवाद भी अत्यंत विस्तृत हैं।

चौघड़िया कैसे देखें? (Step-by-step सहायता)

चौघड़िया देखना बहुत सरल है क्योंकि यह केवल समय के आधार पर गणना की जाती है। किसी भी व्यक्ति को ज्योतिष की गहरी जानकारी न हो, फिर भी वह आसानी से शुभ-अशुभ समय का पता लगा सकता है।

चौघड़िया देखने के लिए तीन मुख्य बातों का ध्यान रखा जाता है —

अपने स्थान का सूर्योदय और सूर्यास्त समय जानें

क्योंकि:

  • सूर्योदय → दिन की चौघड़िया प्रारंभ
  • सूर्यास्त → रात की चौघड़िया प्रारंभ

हर शहर में यह समय अलग होता है।
इसलिए पंचांग या ऐप से अपने क्षेत्र का सही समय देखें।

चौघड़िया तालिका (Fixed order list) देखें

प्रत्येक दिन के चौघड़िया क्रम निश्चित होते हैं
जैसे —

  • सोमवार: अमृत से शुरू
  • मंगलवार: रोग से शुरू
    (तालिका हमने पहले दे दी है ✅)

पूरे समय को बराबर 8 भागों में बाँटें

उदाहरण:
यदि सूर्योदय 6:48:47 AM है और सूर्यास्त 6:27:24 PM
तो:

भागसमयमुहूर्त
106:48:47 — 08:16:07 (तालिका अनुसार) ✅/❌
208:16:07 — 09:43:26

हर चौघड़िया = लगभग 87 मिनट (1 घंटा 27 मिनट 20 सेकेंड)

✅ कौन से चौघड़िया शुभ हैं?

इनमें शुभ फल मिलता है 👇

मुहूर्तलाभदायकता
अमृत🌟 अत्युत्तम
शुभ✅ बहुत शुभ
लाभ✅ लाभकारी
चल🙂 यात्रा हेतु उत्तम

इनके समय में कोई भी शुभ कार्य शुरू कर सकते हैं ✅

❌ किनसे बचना चाहिए?

मुहूर्तप्रभाव
कालअड़चन, देरी
रोगबीमारी/हानि
उद्वेगतनाव/विवाद

इनके समय शुभ कार्य शुरू करने से टालें ❌
(लेकिन पुराने या बाधित कार्य कर सकते हैं)

🌟 अतिरिक्त टिप

यदि शुभ-मुहूर्त और अशुभ-मुहूर्त के बीच में बहुत कम समय का अंतर हो तो कम-से-कम 10-15 मिनट शुभ मुहूर्त में प्रवेश के बाद ही कार्य की शुरुआत करें ✅ चौघड़िया देखकर निर्णय लेना समय प्रबंधन को भी अच्छा बनाता है — और यही इसकी सबसे उपयोगी विशेषता है।

केवल चौघड़िया देखने से काम नहीं चलता — और क्या देखना चाहिए?

चौघड़िया एक अत्यंत उपयोगी और सरल पद्धति है, लेकिन यह पूर्ण मुहूर्त नहीं है। यह सिर्फ समय के आधार पर शुभ-अशुभ संकेत देती है। जबकि किसी भी शुभ कार्य के लिए अन्य ज्योतिषीय तत्व भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए सटीक मुहूर्त निकालने के लिए चौघड़िया के साथ-साथ पंचांग के अन्य अंगों का भी विचार आवश्यक है।

ज्योतिष में समय-निर्णय के पाँच मुख्य अंग हैं:

  • तिथि — शुभ/अशुभ तिथि का अंतर
  • वार — किस दिन कौनसा ग्रह प्रभावी है
  • नक्षत्र — मन और भविष्य पर प्रभाव
  • योग — कर्म की दिशा और गति
  • करण — कार्य की सफलता और पूर्णता

यदि इनमें से कोई तत्व अशुभ स्थिति में हो तो चौघड़िया शुभ होने पर भी कार्य में रुकावट आ सकती है।

लग्न (Ascendant) का भी महत्व

शुभ कार्य किस लग्न में शुरू हो रहा है —
इससे उस कार्य का भविष्य तय होता है।

  • स्थिर लग्न → कार्य स्थायी
  • चर लग्न → कार्य जल्दी पूर्ण
  • द्विस्वभाव लग्न → परिणाम मिश्रित

इसीलिए बड़े शुभ कार्यों में चौघड़िया + लग्न दोनों का विचार किया जाता है ✅

ग्रहों की दृष्टि और चाल

  • शनि, राहु, मंगल आदि की अशुभ दृष्टि
  • ग्रहों का त्रिक भाव (6, 8, 12) में होना
  • ग्रहण काल, संक्रांति या दंडयोग

इन स्थितियों में शुभ कार्य टाल देना चाहिए ✅

व्यक्तिगत जन्म पत्रिका का अध्ययन

  • कार्य और राशि का मेल
  • दशा-अंतर्दशा का प्रभाव
  • वर्तमान गोचर की अनुकूलता
  • ग्रह दोष और उनके उपाय

यह सब व्यक्ति-विशेष को सफलता या असफलता निर्धारित करता है।

📌 व्यावहारिक निष्कर्ष

जब अचानक कार्य करना हो → चौघड़िया पर्याप्त ✅
जब बड़ा शुभ कार्य हो → विस्तृत मुहूर्त आवश्यक ✅

इसलिए:

  • शादी, गृहप्रवेश, नए व्यवसाय का शुभारंभ
    ज्योतिष विशेषज्ञ से शुभ मुहूर्त लेना ही सर्वोत्तम
  • अचानक जरूरी कार्य
    → चौघड़िया देखकर भी शुभ फल मिल सकता है

निष्कर्ष — समय की ऊर्जा और सफलता का रहस्य

चौघड़िया प्राचीन भारतीय समय-विज्ञान की वह सरल और उपयोगी पद्धति है जो हमें यह समझने में मदद करती है कि किसी भी कार्य के लिए उपयुक्त समय कौन सा है। हिन्दू दर्शन सदैव मानता है कि कार्य की सफलता केवल मेहनत से नहीं, बल्कि सही समय और सही दिशा के संयोजन से प्राप्त होती है। ग्रहों की गति निरंतर बदलती रहती है और उसी के साथ बदलती हैं कार्यों की परिस्थितियाँ और ऊर्जा। चौघड़िया देखकर हम समय की इस सूक्ष्म ऊर्जा को अपने पक्ष में कर सकते हैं।

यद्यपि विस्तृत मुहूर्त गणना — तिथि, नक्षत्र, लग्न आदि का विचार कर — शुभ कार्यों में अधिक उपयुक्त होती है, परंतु अचानक लिए जाने वाले निर्णयों में चौघड़िया एक भरोसेमंद मार्गदर्शक सिद्ध होती है। यात्रा, व्यापार, संस्कार, निवेश या किसी भी नए आरम्भ के लिए यह हमें बताती है कि कब ग्रहों की प्रकृति अनुकूल है और कब सतर्क रहने की आवश्यकता है। इसलिए चौघड़िया केवल परंपरा नहीं, बल्कि समय की समझ है, जिसका उद्देश्य है — हमारे प्रयासों को सकारात्मक परिणामों की दिशा में अग्रसर करना। आखिरकार, जीवन में सफलता उन्हीं को मिलती है जो सही कदम, सही समय पर उठाते हैं।

अंतिम संदेश

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