हमारा शरीर हमेशा वर्तमान क्षण में ही मौजूद होता है, लेकिन मन प्रायः या तो बीते हुए कल में उलझा रहता है या आने वाले कल की कल्पनाओं में भटकता रहता है। यहीं से हमारे जीवन में तनाव, असंतोष और अधूरापन जन्म लेता है। हम जिस जीवन को “समस्या” कहकर महसूस करते हैं, वह वास्तव में वर्तमान से कटे हुए हमारे ही मन का परिणाम होता है।
आज की तेज़ रफ्तार दुनिया में Living in the Present Moment एक दुर्लभ अनुभव बनता जा रहा है। तकनीक, तुलना और निरंतर सोच ने हमें इस तरह घेर लिया है कि हम “अभी” को जीना ही भूल गए हैं। जबकि सच यह है कि जीवन कहीं और नहीं, इसी क्षण घट रहा है। जब मन वर्तमान में नहीं होता, तब जीवन होते हुए भी जीया नहीं जाता — और यही हमारी सबसे बड़ी विडंबना है।
तो इन्हीं सब बातों को लेकर हम आज के विषय का श्री गणेश करते हैं; नमस्ते! Anything that makes you feel connected to me — hold on to it. मैं Aviral Banshiwal, आपका दिल से स्वागत करता हूँ|🟢🙏🏻🟢
॥ श्री गणेशाय नमः । श्री सरस्वत्यै नमः । श्री गुरुभ्यो नमः ॥
यदि आप विद्यार्थी हैं और पढ़ाई, भविष्य, करियर या जीवन की दिशा को लेकर मन में असमंजस महसूस करते हैं, और यह समझना चाहते हैं कि Living in the present moment आपके फोकस और निर्णयों को कैसे स्पष्ट कर सकता है, तो आपके लिए विशेष student guidance उपलब्ध है।
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वर्तमान क्षण को न जी पाने की आदत।
हममें से अधिकतर लोग जीवन को जीने के बजाय उसे ऑटो-पायलट मोड पर चलाने लगे हैं। सुबह उठने से लेकर रात सोने तक हम बहुत कुछ करते हैं, लेकिन बहुत कम चीज़ों को सच में महसूस कर पाते हैं। हमारा ध्यान शरीर के साथ नहीं, बल्कि लगातार चल रही सोच के साथ जुड़ा रहता है। हम खाते हुए कुछ और सोच रहे होते हैं, चलते हुए कहीं और होते हैं और किसी से बात करते हुए भी पूरी तरह वहाँ मौजूद नहीं होते।
यही आदत धीरे-धीरे हमें वर्तमान क्षण से दूर ले जाती है। हम जीते कम हैं और सोचते ज़्यादा हैं। इस निरंतर सोच में हम अनुभव को नहीं, केवल उसकी व्याख्या को पकड़ते हैं। नतीजा यह होता है कि जीवन हमारे सामने घटता रहता है, लेकिन हम उससे कटे रहते हैं। Living in the present moment कठिन इसलिए नहीं है कि वह असंभव है, बल्कि इसलिए कि हमने बिना महसूस किए जीने की आदत बना ली है। यही आदत हमें स्वयं के जीवन से अनजाने में दूर करती चली जाती है।
अतीत का बोझ और भविष्य की चिंता।
हम अक्सर यह महसूस करते हैं कि हमारा मन कभी शांत नहीं रहता। जब ध्यान से देखें, तो पता चलता है कि वह या तो अतीत की स्मृतियों में उलझा होता है या भविष्य की कल्पनाओं में भटकता रहता है। बीती हुई बातें, पुराने निर्णय, कही-अनकही बातें — ये सब धीरे-धीरे हमारे भीतर बोझ बन जाती हैं। हम उन्हें याद नहीं करते, बल्कि वे हमें पकड़े रहती हैं।
दूसरी ओर, भविष्य के बारे में हमारी कल्पनाएँ अक्सर डर, असुरक्षा और अपेक्षाओं से भरी होती हैं। क्या होगा, कैसे होगा, ठीक होगा या नहीं — इन सवालों में हमारी मानसिक ऊर्जा लगातार खर्च होती रहती है। इस खिंचाव में न अतीत सच में सुलझता है, न भविष्य स्पष्ट होता है। जो खो जाता है, वह है वर्तमान क्षण।

जब मन अतीत और भविष्य के बीच झूलता रहता है, तब Living in the present moment लगभग असंभव-सा लगने लगता है। यहीं से सुख और दुःख की हमारी परिभाषाएँ उलझती चली जाती हैं तथा सुख और दुःख का वास्तविक अर्थ↗ और जीवन भारी-सा महसूस होने लगता है, बिना किसी स्पष्ट कारण के।
वर्तमान में जीना क्या है और क्या नहीं है?
अक्सर हमारे मन में यह भ्रम होता है कि वर्तमान में जीना शायद लापरवाही है, या फिर भविष्य की जिम्मेदारियों से मुँह मोड़ लेना। लेकिन सच यह है कि वर्तमान में जीना किसी भी तरह से पलायन नहीं है। यह न तो कर्तव्यों से भागना है और न ही परिणामों के प्रति उदासीन होना। बल्कि यह जीवन को पूरी सजगता के साथ देखना और जीना है।
Present moment awareness का अर्थ यह नहीं कि हम कल के बारे में सोचें ही नहीं, बल्कि यह है कि जो भी सोचें, उसे अभी की स्पष्टता के साथ सोचें। जब हम Living consciously होते हैं, तब हमारे निर्णय अधिक संतुलित होते हैं और प्रतिक्रियाएँ कम होती हैं।
वर्तमान में जीना दरअसल Mindfulness in daily life का अभ्यास है — जहाँ हम जो कर रहे हैं, उसी में पूरी तरह उपस्थित होते हैं। यही उपस्थिति धीरे-धीरे हमें Awareness and inner peace की ओर ले जाती है, जहाँ जीवन भागता हुआ नहीं, बल्कि ठहरा हुआ और स्पष्ट महसूस होने लगता है।
सुख, शांति और वर्तमान का संबंध
हम सभी सुख चाहते हैं, लेकिन अक्सर यह शिकायत भी करते हैं कि सुख टिकता नहीं। थोड़ा-सा अच्छा लगता है और फिर वही खालीपन लौट आता है। जब ईमानदारी से देखें, तो समझ आता है कि सुख का अनुभव हमें हमेशा वर्तमान क्षण में ही होता है, लेकिन हम उसे पकड़े रखना चाहते हैं। यही पकड़ उसे क्षणिक बना देती है।
शांति का अनुभव इससे अलग है। शांति किसी उपलब्धि से नहीं आती, बल्कि तब महसूस होती है जब मन कहीं और भटकने के बजाय यहीं ठहर जाता है। Living in the present moment हमें वही ठहराव देता है, जहाँ न कुछ जोड़ने की जल्दी होती है और न कुछ खोने का डर।
जब Present moment awareness गहराने लगती है, तब हम पाते हैं कि सुख और दुःख दोनों आते-जाते हैं, लेकिन भीतर की स्थिरता बनी रहती है। यही स्थिरता धीरे-धीरे Awareness and inner peace का रूप ले लेती है तब जीवन का अनुभव बदलता है — बाहरी परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि उन्हें देखने का हमारा तरीका बदल जाता है।
कर्म, निर्णय और वर्तमान क्षण
हम अक्सर यह सोचते हैं कि हमारे कर्म भविष्य के लिए होते हैं, लेकिन सच यह है कि हर कर्म हमेशा अभी में ही होता है। हम जो भी निर्णय लेते हैं, वह बीते हुए अनुभवों और आने वाली आशाओं के बीच होते हुए भी, इसी क्षण में जन्म लेता है। इसलिए वर्तमान क्षण से कटकर लिया गया कोई भी निर्णय अधूरा ही रहता है।
जब हम Living in the present moment होते हैं, तब हमारे कर्मों में स्पष्टता आती है। हम जल्दबाज़ी में प्रतिक्रिया नहीं देते, बल्कि स्थिति को देखकर उत्तर देते हैं। यही Living consciously होने का संकेत है। भविष्य की नींव कल्पनाओं से नहीं, बल्कि वर्तमान में किए गए सजग कर्मों से बनती है।

Mindfulness in Daily Life हमें यह समझने में मदद करती है कि हर छोटा निर्णय भी कितना महत्वपूर्ण होता है। जब Present Moment Awareness के साथ कर्म किया जाता है, तब परिणामों की चिंता कम होती है और भीतर एक स्थिर भरोसा जन्म लेता है तथा कर्म और भाग्य का जीवन में स्थान↗ समझ आने लगता है।
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मन, सजगता और वर्तमान
हम में से अधिकतर लोग यह महसूस करते हैं कि मन को रोकना बहुत कठिन है। वह कभी किसी पुरानी बात को पकड़ लेता है, कभी किसी आने वाली स्थिति की कल्पना करने लगता है। मन का यही स्वभाव है — भटकना। समस्या मन का भटकना नहीं, बल्कि हमारा बिना जाने उसके साथ बहते चले जाना है। जब ऐसा होता है, तो हम धीरे-धीरे वर्तमान क्षण से दूर होते चले जाते हैं।
यहीं पर Present moment awareness की भूमिका सामने आती है। सजगता का अर्थ मन को दबाना या विचारों को रोकना नहीं है, बल्कि यह देख पाना है कि मन इस समय क्या कर रहा है। जैसे ही हम देखना शुरू करते हैं, वैसे ही मन और हमारे बीच थोड़ी दूरी बनती है। यही दूरी हमें Living consciously होने का अवसर देती है।
जब हम सजग होते हैं, तब हम यह भी महसूस करते हैं कि मन के विचार आते-जाते रहते हैं, लेकिन हम उनसे अलग भी रह सकते हैं। यही समझ धीरे-धीरे Living in the present moment को संभव बनाती है। हम काम करते हुए भी भीतर से जुड़े रहते हैं, और संबंधों में रहते हुए भी स्वयं को नहीं खोते।

Mindfulness in daily life का अभ्यास यहीं से शुरू होता है — छोटे-छोटे क्षणों में, बिना किसी विशेष प्रयास के। जैसे सांस को महसूस करना, शरीर की स्थिति को जानना, या सामने वाले को सच में सुन पाना। इन क्षणों में एक गहरी शांति जन्म लेती है, जिसे हम Awareness and inner peace के रूप में अनुभव करते हैं तथा मन, बुद्धि और आत्मा का संतुलन↗ बनता है और यही संतुलन हमें जीवन के बीचों-बीच स्थिर रहना सिखाता है।
वर्तमान में जीने से जीवन में संतुलन
हम अक्सर संतुलन को किसी आदर्श स्थिति की तरह देखते हैं — जैसे एक दिन सब कुछ ठीक हो जाएगा और तब जीवन सहज हो जाएगा। लेकिन अनुभव यह बताता है कि परिस्थितियाँ शायद ही कभी पूरी तरह अनुकूल होती हैं। ऐसे में संतुलन बाहर नहीं, हमारे भीतर से शुरू होता है। जब हम Living in the present moment होते हैं, तब जीवन के अलग-अलग पहलू अपने-आप एक लय में आने लगते हैं।
काम करते समय हमारा मन कहीं और भटकता नहीं, इसलिए कार्य का बोझ कम लगता है। संबंधों में रहते हुए हम केवल प्रतिक्रिया नहीं देते, बल्कि सामने वाले को समझने की जगह बना पाते हैं। यही Present moment awareness हमें काम, संबंध और स्वयं — तीनों के बीच संतुलन सिखाती है।
Living consciously होने का एक बड़ा लाभ यह है कि हमारी प्रतिक्रियाएँ धीरे-धीरे कम होने लगती हैं। हम हर बात पर तुरंत जवाब नहीं देते, बल्कि भीतर ठहरकर प्रतिक्रिया चुनते हैं। इस प्रक्रिया में Mindfulness in daily life स्वाभाविक रूप से विकसित होती है।
जब मन बार-बार अतीत या भविष्य में नहीं उलझता, तब भीतर एक सहज शांति अनुभव होती है। यही शांति Awareness and inner peace का रूप ले लेती है, जो हमें भागते हुए जीवन के बीच भी स्थिर बनाए रखती है और हमें यह समझ आता है कि जीवन में संतुलन कैसे बनाएं?↗ इस तरह वर्तमान में जीना किसी अतिरिक्त प्रयास जैसा नहीं लगता, बल्कि जीवन को सहज रूप से जीने की कला बन जाता है।
वर्तमान से भागने के सामान्य बहाने
हममें से अधिकतर लोग यह मानना नहीं चाहते, लेकिन सच यह है कि हम अक्सर वर्तमान से भागने के लिए खुद ही बहाने गढ़ लेते हैं। हम कहते हैं — “अभी समय नहीं है”, “सब ठीक हो जाए तब देखेंगे” या “अभी बहुत जिम्मेदारियाँ हैं”। सुनने में ये बातें व्यावहारिक लगती हैं, लेकिन भीतर कहीं न कहीं ये वर्तमान क्षण से बचने के तरीके होते हैं।
हम यह मान लेते हैं कि जीवन बाद में जिया जाएगा, जब हालात अनुकूल होंगे। लेकिन यह “बाद में” कभी आता ही नहीं। इस तरह हम Living in the present moment को लगातार टालते रहते हैं, बिना यह समझे कि जीवन अभी ही घट रहा है।
इन बहानों के पीछे अक्सर डर छिपा होता है — अपने भीतर झाँकने का डर, अधूरी भावनाओं का सामना करने का डर। Present moment awareness हमें इन बातों से रूबरू कराती है, इसलिए मन उनसे बचना चाहता है। लेकिन जब हम Living consciously होना शुरू करते हैं, तब समझ आता है कि भागने से नहीं, बल्कि ठहरने से हल निकलता है।
Mindfulness in daily life हमें धीरे-धीरे यह सिखाती है कि वर्तमान से बचना नहीं, बल्कि उसे समझना ही वास्तविक समाधान है। तभी भीतर Awareness and inner peace की संभावना बनती है।
दैनिक जीवन में वर्तमान का अभ्यास
वर्तमान में जीना कोई अलग से किया जाने वाला अभ्यास नहीं है, बल्कि वही है जो हम रोज़ करते हैं — बस थोड़ा अधिक सजग होकर। दिन की शुरुआत से लेकर उसके अंत तक हमारे पास ऐसे कई छोटे-छोटे क्षण होते हैं, जहाँ हम स्वयं से जुड़ सकते हैं। जैसे चलते समय कदमों को महसूस करना, खाते समय स्वाद पर ध्यान देना या किसी की बात को सच में सुन पाना।
यही छोटे क्षण Living in the present moment को संभव बनाते हैं। जब हम इन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करते, तब Present moment awareness धीरे-धीरे हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन जाती है। इसमें कोई जल्दबाज़ी नहीं होती, न ही किसी विशेष परिणाम की अपेक्षा।
Mindfulness in daily life का असली महत्व निरंतरता में है। जब हम बार-बार वर्तमान में लौटना सीख लेते हैं, तब Living consciously होना स्वाभाविक हो जाता है। इसी निरंतर अभ्यास से भीतर एक गहरी स्थिरता जन्म लेती है, जिसे हम Awareness and inner peace के रूप में अनुभव करते हैं।
निष्कर्ष: जीवन हमेशा अभी में घटता है।
अंततः जब हम पूरे जीवन को ध्यान से देखते हैं, तो यह स्पष्ट होने लगता है कि जीवन न अतीत में है और न ही भविष्य में। जो कुछ भी सच में घटता है, वह हमेशा इसी क्षण में घटता है। फिर भी हम बार-बार जीवन को कहीं और खोजते रहते हैं। Living in the present moment कोई दर्शन भर नहीं, बल्कि जीवन को पूरी तरह अनुभव करने की अवस्था है।
जब Present moment awareness हमारे भीतर गहराने लगती है, तब हम यह समझ पाते हैं कि सुख, दुःख, सफलता या असफलता — सब आते-जाते अनुभव हैं। जो स्थिर रहता है, वह है इस क्षण में हमारी उपस्थिति। यही उपस्थिति हमें Living consciously होने की दिशा में ले जाती है।
Mindfulness in daily life के माध्यम से जब हम बार-बार वर्तमान में लौटते हैं, तब भीतर Awareness and inner peace का बीज पड़ता है। यही बीज आगे आने वाले हिस्सों में जीवन को और गहराई से समझने का आधार बनेगा — जहाँ यात्रा बाहर से अधिक भीतर की होगी।
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अंतिम संदेश
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FAQ
वर्तमान में जीना वास्तव में क्या होता है?
वर्तमान में जीना किसी विशेष अवस्था को प्राप्त करना नहीं है, बल्कि जो कुछ अभी घट रहा है, उसके साथ पूरी तरह मौजूद रहना है। इसका अर्थ यह नहीं कि अतीत को नकार दिया जाए या भविष्य की योजना न बनाई जाए। बल्कि इसका मतलब यह है कि सोच, भावना और शरीर — तीनों एक ही क्षण में जुड़े हों। जब हम खाते हुए केवल खाते हैं, सुनते हुए सच में सुनते हैं, और निर्णय लेते समय पूरी तरह सजग होते हैं, तब हम वर्तमान में होते हैं। यही उपस्थिति जीवन को भारी होने से बचाती है और उसे अधिक स्पष्ट व सहज बना देती है।
वर्तमान में जीना इतना कठिन क्यों लगता है?
वर्तमान में जीना कठिन इसलिए नहीं लगता क्योंकि वह असंभव है, बल्कि इसलिए कि हमारा मन लंबे समय से अतीत और भविष्य में भटकने का आदी हो चुका है। बीती हुई यादें और आने वाली चिंताएँ हमें लगातार व्यस्त रखती हैं। इसके अलावा, तेज़ जीवनशैली, तुलना और लगातार सोचने की आदत ने हमें “अभी” से दूर कर दिया है। जब मन बिना रुके चलता रहता है, तब वर्तमान में ठहरना असहज लगने लगता है। लेकिन जैसे-जैसे हम इस आदत को पहचानते हैं और थोड़ी सजगता लाते हैं, वर्तमान में रहना धीरे-धीरे आसान होने लगता है।
क्या वर्तमान में जीने से भविष्य की चिंता कम होती है?
हाँ, वर्तमान में जीने से भविष्य की चिंता धीरे-धीरे कम होने लगती है। इसका कारण यह है कि जब हम बार-बार आने वाले कल के बारे में सोचते हैं, तो हमारी ऊर्जा वर्तमान से कट जाती है। लेकिन जब हम अभी के क्षण पर ध्यान देते हैं, तो मन को यह अनुभव होता है कि इस समय सब कुछ संभाला जा सकता है। इससे भीतर भरोसा पैदा होता है। भविष्य की योजना बनाना ज़रूरी है, लेकिन उसमें खो जाना चिंता को जन्म देता है। वर्तमान में रहना हमें संतुलन सिखाता है, जहाँ योजना भी होती है और डर भी कम हो जाता है।
क्या वर्तमान में जीना तनाव और बेचैनी को कम करता है?
वर्तमान में जीने का सबसे प्रत्यक्ष प्रभाव यही होता है कि तनाव और बेचैनी धीरे-धीरे कम होने लगते हैं। तनाव अक्सर अतीत की बातों या भविष्य की आशंकाओं से पैदा होता है। जब मन बार-बार इन्हीं में उलझा रहता है, तो बेचैनी स्वाभाविक हो जाती है। लेकिन जैसे ही हम इस क्षण में लौटते हैं, मन को एक तरह का ठहराव मिलता है। यह ठहराव तुरंत सब कुछ ठीक नहीं करता, लेकिन भीतर एक स्थिरता पैदा करता है। उसी स्थिरता से तनाव को संभालने की क्षमता आती है, और मन हल्का महसूस करने लगता है।
क्या वर्तमान में जीना अभ्यास से सीखा जा सकता है?
हाँ, वर्तमान में जीना कोई जन्मजात कला नहीं है, बल्कि अभ्यास से विकसित होने वाली समझ है। शुरुआत में मन बार-बार भटकेगा, यह स्वाभाविक है। अभ्यास का अर्थ मन को रोकना नहीं, बल्कि हर बार भटकने के बाद उसे धीरे से वापस लाना है। छोटे-छोटे क्षणों में सजग रहना, जैसे सांस को महसूस करना या किसी काम को पूरी उपस्थिति के साथ करना, इस प्रक्रिया का हिस्सा है। समय के साथ यह अभ्यास सहज होने लगता है और वर्तमान में रहना किसी प्रयास की तरह नहीं, बल्कि स्वाभाविक अवस्था जैसा महसूस होने लगता है।
क्या वर्तमान में जीना जीवन की जिम्मेदारियों से भागना है?
नहीं, वर्तमान में जीना किसी भी तरह से जिम्मेदारियों से भागना नहीं है। बल्कि यह जिम्मेदारियों को अधिक स्पष्टता के साथ निभाने की क्षमता देता है। जब हम वर्तमान में होते हैं, तब हम स्थिति को पूरी तरह देख पाते हैं और उसी अनुसार निर्णय लेते हैं। इससे लापरवाही नहीं, बल्कि सजगता बढ़ती है। भविष्य की योजना बनाना और अतीत से सीखना ज़रूरी है, लेकिन उन दोनों में उलझे रहना हमें कमजोर बनाता है। वर्तमान में जीना हमें जीवन के हर पहलू में अधिक जिम्मेदार, संतुलित और स्थिर बनाता है।

