Manglik Dosh का नाम सुनते ही अधिकतर लोगों के मन में डर, असमंजस और नकारात्मक धारणाएँ बन जाती हैं। विवाह में देरी, रिश्तों में तनाव और जीवन में बाधाएँ—इन सबका दोष अक्सर सीधे मांगलिक दोष पर डाल दिया जाता है। लेकिन क्या वास्तव में मांगलिक दोष उतना ही खतरनाक है, जितना उसे बताया जाता है? या फिर यह ज्योतिष की सबसे ज़्यादा गलत समझी जाने वाली अवधारणाओं में से एक है? इस लेख में हम मांगलिक दोष के वास्तविक अर्थ, उसके सकारात्मक-नकारात्मक प्रभाव, प्रचलित भ्रम और शास्त्रसम्मत सत्य को बिना डर फैलाए, स्पष्ट और संतुलित दृष्टि से समझने का प्रयास करेंगे।
तो इन्हीं सब बातों को लेकर हम आज के विषय का श्री गणेश करते हैं; नमस्ते! Anything that makes you feel connected to me — hold on to it. मैं Aviral Banshiwal, आपका दिल से स्वागत करता हूँ|🟢🙏🏻🟢
॥ श्री गणेशाय नमः । श्री सरस्वत्यै नमः । श्री गुरुभ्यो नमः ॥
यदि आप यह जानना चाहते हैं कि आपकी या आपके होने वाले जीवनसाथी की कुंडली में Manglik Dosh वास्तव में है या नहीं, उसका स्तर क्या है और उसका विवाह पर वास्तविक प्रभाव क्या पड़ता है, तो आप व्यक्तिगत ज्योतिषीय मार्गदर्शन बुक कर सकते हैं।
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मंगल दोष बनने के शास्त्रीय नियम (Mangal Dosh Kya Hota Hai)
Manglik Dosh बनने के नियमों को सबसे पहले समझना आवश्यक है, ताकि व्यक्ति यह जान सके कि मंगल दोष वास्तव में बनता कैसे है, न कि केवल डर या सुनी-सुनाई बातों के आधार पर स्वयं को मांगलिक मान ले।
मंगल दोष बनने के मुख्य नियम
मंगल दोष तब माना जाता है जब निम्नलिखित तीनों शर्तें एक साथ पूरी होती हों:
- लग्न कुंडली में मंगल मारक ग्रह की श्रेणी में हो
अर्थात् मंगल उस लग्न के लिए अशुभ या बाधक ग्रह की भूमिका निभा रहा हो। - मंगल लग्न कुंडली के 1, 2, 4, 7, 8 या 12वें भाव में स्थित हो
ये सभी भाव जीवन, दांपत्य, गृहस्थी, मानसिक शांति और संबंधों से जुड़े हुए हैं। इसलिए इन भावों में मंगल की उग्र ऊर्जा वैवाहिक जीवन में असंतुलन उत्पन्न कर सकती है। - मंगल बलशाली अवस्था में हो
दूसरे भाव (2H) को मंगल दोष में शामिल करने का तर्क
उत्तर भारत में सामान्यतः दूसरे भाव को मंगल दोष में शामिल नहीं किया जाता, जबकि दक्षिण भारत की परंपरा में इसे शामिल किया जाता है। मैंने यहाँ दूसरे भाव (2H) को मंगल दोष में शामिल किया है, और इसके पीछे ठोस ज्योतिषीय कारण हैं:
- कुंडली का दूसरा भाव वाणी, पारिवारिक संस्कार और संबंधों की नींव को दर्शाता है।
- जब मंगल यहाँ मारक स्थिति में बैठता है, तो व्यक्ति की वाणी में:
- उग्रता
- कटुता
- आक्रामकता आ जाती है।
इस स्थिति में व्यक्ति के अन्य रिश्ते तो सामान्य रह सकते हैं, लेकिन पति–पत्नी के संबंधों में बार-बार तनाव, मनमुटाव और टकराव बना रहता है।
कई मामलों में यह उग्र वाणी:
- लगातार झगड़े
- भावनात्मक दूरी
- और अंततः विवाह विच्छेद (Divorce) तक की स्थिति पैदा कर देती है।
👉 इसी व्यावहारिक अनुभव और शास्त्रीय तर्क को ध्यान में रखते हुए मैंने मंगल दोष के नियमों में दूसरे भाव को भी सम्मिलित किया है।
मंगल दोष समाप्त होने के नियम
मंगल दोष बनने के नियम जानने जितना ही ज़रूरी है यह समझना कि कई बार उपरोक्त नियम पूरे होने के बावजूद मंगल दोष प्रभावी नहीं रहता। नीचे दिए गए नियमों में से एक या अधिक लागू होने पर मंगल दोष समाप्त या निष्क्रिय हो जाता है:
मंगल दोष समाप्त होने की प्रमुख स्थितियाँ (Mangal Dosha Cancellation)
- लग्न कुंडली में मंगल योगकारक ग्रह की श्रेणी में आ जाए
ऐसे में मंगल बाधा नहीं, बल्कि सहायक शक्ति बन जाता है। - मंगल 0°, 1°, 2°, 28° या 29° डिग्री पर स्थित हो
इन डिग्रियों पर मंगल या तो नवजात होता है या मृत होने के कगार पर— जिससे उसकी उग्रता प्रभावी नहीं रह जाती। - मंगल सूर्य से अस्त हो
सूर्य की प्रबलता मंगल की नकारात्मक ऊर्जा को दबा देती है। - मंगल के साथ बलवान गुरु की युति या गुरु की दृष्टि हो
गुरु का प्रभाव मंगल की उग्रता को धर्म, विवेक और संतुलन में बदल देता है। - मंगल स्वराशि या उच्च का होकर शुभ ग्रहों से समर्थित हो
तब मंगल दोष नहीं बल्कि साहस और स्थिरता प्रदान करता है। - लग्नेश की प्रकृति को समझना और उसकी लग्न कुंडली में स्थिति को अच्छी तरह देखना।
सप्तम भाव (7H) का विशेष नियम
- यदि सप्तमेश स्वयं सातवें भाव में स्थित हो
या - सप्तम भाव पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि हो
- नवमांश कुंडली में ग्रहों की स्थिति अच्छी हो
तो वैवाहिक जीवन सुरक्षित रहता है, और मंगल दोष का प्रभाव स्वतः कमजोर या समाप्त हो जाता है।
उदाहरण द्वारा Manglik Dosh की वास्तविक जाँच
Manglik Dosh को केवल भाव-स्थिति देखकर तय नहीं किया जा सकता। इसे सही रूप से समझने के लिए अब हम तुला लग्न, सिंह लग्न और मिथुन लग्न की तीन वास्तविक कुंडलियों के उदाहरणों के माध्यम से यह स्पष्ट करेंगे कि कहाँ मंगल दोष बनता है और कहाँ नहीं।
उदाहरण 1: तुला लग्न की कुंडली में Manglik Dosh की स्थिति

उपर्युक्त तुला लग्न की कुंडली में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि मंगल इस लग्न के लिए मारक ग्रह की श्रेणी में आता है, साथ ही वह बलशाली अवस्था में है और द्वादश भाव (12H) में स्थित है। यदि केवल Mangal Dosh बनने के मूल नियमों को देखा जाए, तो इस कुंडली में वे सभी शर्तें पूरी होती प्रतीत होती हैं। इस आधार पर प्रथम दृष्टि में यह कुंडली Manglik Dosh से युक्त मानी जा सकती है।
लेकिन किसी भी कुंडली में केवल दोष बनने के नियम देखना पर्याप्त नहीं होता। Mangal Dosh न होने अथवा समाप्त होने के नियमों को साथ-साथ जाँचना उतना ही आवश्यक है। जब हम मंगल दोष निरस्तीकरण के नियमों पर दृष्टि डालते हैं, तो वहाँ चौथा नियम विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनकर सामने आता है, जिसके अनुसार—
यदि मंगल के साथ गुरु की युति हो या गुरु की दृष्टि संबंध बने, तो मंगल दोष का प्रभाव समाप्त हो जाता है।
उपर्युक्त तुला लग्न कुंडली में यही स्थिति देखने को मिलती है।
द्वादश भाव (12H) में मंगल के साथ गुरु की स्पष्ट युति उपस्थित है। इस कारण, Mangal Dosh बनने के सभी प्रारंभिक नियम पूरे होने के बावजूद भी, यह कुंडली वास्तव में Manglik Dosh से मुक्त मानी जाएगी।
✦ गुरु–मंगल युति से मंगल दोष क्यों समाप्त हो जाता है?
बृहस्पति (गुरु) ग्रह को शास्त्रों में परिवार, धर्म, विवेक और संरक्षण का कारक माना गया है। गुरु का स्वभाव निर्माण करने वाला होता है, न कि विघटन करने वाला। जब मंगल जैसी उग्र और तीव्र ऊर्जा गुरु के संपर्क में आती है—चाहे वह युति से हो या दृष्टि से—तो मंगल की उग्रता संतुलित हो जाती है।
इसी कारण, भले ही मंगल:
- मारक ग्रह की श्रेणी में हो
- बलशाली अवस्था में हो
- और संवेदनशील भाव में स्थित हो
फिर भी गुरु का साथ Mangal Dosh के निर्माण को रोक देता है। गुरु मंगल की नकारात्मक ऊर्जा को नियंत्रित कर उसे सकारात्मक दिशा प्रदान करता है, जिससे दांपत्य और पारिवारिक जीवन में वास्तविक हानि नहीं होती।
✦ लग्न, लग्नेश की प्रकृति और उसकी स्थिति का वैवाहिक जीवन पर प्रभाव
तुला लग्न की मूल प्रकृति ही सामंजस्य, संतुलन और समझौते की कला पर आधारित होती है। यह लग्न जीवन के हर क्षेत्र में टकराव के बजाय समाधान खोजने की प्रवृत्ति देता है। इसलिए जब किसी कुंडली का लग्न तुला हो, तो वहाँ केवल ग्रह-दोषों के आधार पर वैवाहिक विघटन की आशंका करना अधूरा विश्लेषण माना जाता है।
तुला लग्न का स्वामी शुक्र होता है, जो स्वभाव से कूटनीतिज्ञ, सौंदर्यबोधी और मानसिक स्तर पर अत्यंत प्रभावशाली ग्रह है। शुक्र के पास दूसरों की सोच को प्रभावित करने, परिस्थितियों को अपने पक्ष में मोड़ने और संबंधों को बिना संघर्ष के संभालने की अद्भुत क्षमता होती है। इसे नकारात्मक अर्थ में नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक संतुलन और व्यवहारिक कुशलता के रूप में समझना चाहिए।
✦ लग्नेश शुक्र की दशम भाव में स्थिति का प्रभाव
उपर्युक्त कुंडली में लग्नेश शुक्र दशम भाव (10H) में स्थित है, जो कि कर्म, आचरण और सामाजिक व्यवहार का भाव माना जाता है। इस स्थिति का सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि व्यक्ति—
- अपने कर्मों को सोच-समझकर करता है
- भावनाओं में बहकर अनुचित निर्णय नहीं लेता
- संबंधों में जिम्मेदारी और मर्यादा बनाए रखता है
ऐसा व्यक्ति अपने जीवनसाथी को केवल सुने बिना नहीं रहता, बल्कि उसे समझकर, तौलकर और संतुलित प्रतिक्रिया देना उसकी आदत बन जाती है।
✦ विवाद क्यों जन्म नहीं लेते?
तुला लग्न + शुक्र की कर्म भाव में स्थिति का यह संयोजन व्यक्ति को यह सिखाता है कि रिश्तों को जीतना है, लड़ना नहीं।
- वह संवाद को हथियार नहीं, समाधान बनाता है
- प्रतिक्रिया से पहले विचार करता है
- और ego की बजाय harmony को प्राथमिकता देता है
यही कारण है कि भले ही कुंडली में मंगल जैसे उग्र ग्रह की स्थिति अच्छी ना हो, तो भी विवाद जन्म ही नहीं ले पाते, और यदि कभी उत्पन्न हों भी, तो वे विवाह-विच्छेद तक पहुँचने से पहले ही नियंत्रित हो जाते हैं।
उदाहरण 2: सिंह लग्न की कुंडली में मंगल: दोष या योगकारक शक्ति?

उपर्युक्त सिंह लग्न की कुंडली में यह स्पष्ट दिखाई देता है कि मंगल सप्तम भाव (7H) में स्थित है और साथ ही बलशाली अवस्था में भी है। सामान्य दृष्टि से देखने पर कई लोग केवल सातवें भाव में मंगल की उपस्थिति के आधार पर इसे तुरंत Manglik Dosh मान लेते हैं, लेकिन यह दृष्टिकोण अधूरा और त्रुटिपूर्ण है।
सबसे पहले यह समझना आवश्यक है कि सिंह लग्न में मंगल योगकारक ग्रह होता है।
मंगल इस लग्न के लिए—
- चतुर्थ भाव (4H) का स्वामी है → सुख, गृहस्थी, भावनात्मक स्थिरता
- नवम भाव (9H) का स्वामी है → धर्म, नैतिकता, भाग्य और संस्कार
इन दोनों भावों का स्वामी होने के कारण मंगल का स्वभाव यहाँ सकारात्मक, संरक्षण देने वाला और निर्माणकारी हो जाता है।
✦ सिंह लग्न की मूल प्रवृत्ति और वैवाहिक दृष्टिकोण
सिंह लग्न स्वयं में स्थायित्व, नेतृत्व और संरक्षण का प्रतीक होता है।
यह लग्न—
- अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले लोगों को अपनी ज़िम्मेदारी मानता है
- जीवनसाथी और परिवार के प्रति संरक्षण भाव रखता है
- संबंधों को छोड़ने से पहले उन्हें बचाने का हर संभव प्रयास करता है
इसलिए सिंह लग्न में केवल मंगल की स्थिति देखकर विवाह में विघटन की आशंका करना व्यावहारिक नहीं है।
✦ लग्नेश सूर्य की नवम भाव में उच्च स्थिति का प्रभाव
इस कुंडली में लग्नेश सूर्य नवम भाव में, मेष राशि में उच्च का स्थित है। नवम भाव धर्म, नीति, संस्कार और जीवन-दर्शन का भाव होता है। लग्नेश का यहाँ स्थित होना दर्शाता है कि—
- व्यक्ति को धर्म और नैतिकता का गहरा ज्ञान होगा
- उचित और अनुचित का विवेक स्पष्ट होगा
- वह भावनाओं में बहकर गलत निर्णय नहीं लेगा
- जीवनसाथी के साथ न्यायपूर्ण और जिम्मेदार व्यवहार करेगा
यह स्थिति वैवाहिक जीवन में संयम, मर्यादा और समझदारी प्रदान करती है।
✦ मंगल के सप्तम भाव में होने के बावजूद दोष क्यों नहीं बनता?
यद्यपि मंगल यहाँ—
- बलशाली है
- सप्तम भाव में स्थित है
लेकिन क्योंकि वह योगकारक ग्रह की भूमिका में है, इसलिए उसका प्रभाव दोषकारक नहीं हो सकता। योगकारक ग्रह की मूल परिभाषा यही है कि—
जो ग्रह जीवन में सहयोग, उन्नति और सकारात्मक परिणाम दे, वह दोष का निर्माण नहीं कर सकता।
मंगल यहाँ:
- दांपत्य में साहस और संरक्षण देता है
- संबंधों को निभाने की शक्ति देता है
- टकराव नहीं, बल्कि स्थिरता की भावना पैदा करता है
इसलिए इस कुंडली में मंगल की स्थिति विवाह के लिए बाधक नहीं, बल्कि सहायक बन जाती है।
उदाहरण 3: मिथुन लग्न की कुंडली में Manglik Dosh का सत्य

अब तीसरे उदाहरण के रूप में हम मिथुन लग्न की कुंडली को देखते हैं, जहाँ Manglik Dosh न केवल बन रहा है, बल्कि पूर्ण रूप से सक्रिय अवस्था में उपस्थित है। यह उदाहरण यह समझाने के लिए अत्यंत आवश्यक है कि हर अच्छी दिखने वाली कुंडली विवाह के लिए सुरक्षित हो—यह आवश्यक नहीं।
✦ मंगल की स्थिति और भूमिका (Core Problem)
उपर्युक्त मिथुन लग्न की कुंडली में मंगल सप्तम भाव (7H) में धनु राशि में स्थित है।
यहाँ ध्यान देने योग्य प्रमुख बिंदु हैं:
- सप्तम भाव पर किसी भी शुभ ग्रह की दृष्टि नहीं है
- मंगल यहाँ बलशाली अवस्था में है
- और सीधे लग्न को सप्तम दृष्टि से प्रभावित कर रहा है
मिथुन लग्न में मंगल का सबसे बड़ा दोष यह है कि—
- मंगल लग्नेश बुध का शत्रु ग्रह है
- मंगल को इस लग्न में
- षष्ठ भाव (6H) → ऋण, विवाद, शत्रु
- एकादश भाव (11H) → लालसा, असंतोष का स्वामित्व प्राप्त होता है
ये दोनों भाव विवाह और संबंधों की दृष्टि से सहायक नहीं माने जाते। इसी कारण मिथुन लग्न में मंगल मारक ग्रह की श्रेणी में आ जाता है।
✦ सप्तम भाव में मारक मंगल का प्रभाव
जब कोई ग्रह—
- मारक हो
- बलशाली हो
- और सप्तम भाव में स्थित हो
तो उसका प्रभाव सीधे दांपत्य जीवन, जीवनसाथी और वैवाहिक स्थिरता पर पड़ता है।
इस कुंडली में मंगल:
- विवाद को जन्म देता है
- संबंधों में टकराव बढ़ाता है
- और लग्न पर दृष्टि डालकर व्यक्ति की मानसिक शांति को भी कमजोर करता है
यह स्थिति क्लासिक Manglik Dosh का निर्माण करती है।
✦ लग्न और लग्नेश से दोष क्यों समाप्त नहीं हुआ?
यहाँ लग्न मिथुन है और लग्नेश बुध नवम भाव (9H) में स्थित हैं, जो सामान्यतः अच्छी स्थिति मानी जाती है। लेकिन केवल लग्नेश की अच्छी स्थिति Manglik Dosh को समाप्त नहीं कर सकती, यदि—
- मंगल पर गुरु की युति या दृष्टि न हो
- मंगल अस्त न हो
- मंगल योगकारक न हो
- सप्तम भाव को कोई शुभ ग्रह संरक्षित न कर रहा हो
👉 इस कुंडली में Mangal Dosh समाप्त होने का एक भी नियम लागू नहीं होता।
✦ अंतिम निर्णय: पूर्ण Manglik Dosh
इस तृतीय उदाहरण में हम स्पष्ट रूप से देखते हैं कि—
- मंगल मारक है
- मंगल बलशाली है
- मंगल सप्तम भाव में है
- मंगल दोष निरस्तीकरण का कोई नियम लागू नहीं होता
इसलिए यहाँ Manglik Dosh पूर्ण रूप से निर्मित होता है।
✦ सबसे महत्वपूर्ण सीख (Real-Life Confirmation)
अब आपने यह भी देखा कि यह कुंडली देखने में काफी अच्छी और मजबूत प्रतीत होती है, लेकिन केवल Manglik Dosh की उपस्थिति ने इसके वैवाहिक जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित किया।
👉 इस व्यक्ति का प्रथम विवाह असफल रहा।
👉 इसके पश्चात द्वितीय विवाह हुआ।
👉 और दूसरे विवाह के लिए कुंडली मिलान स्वयं मेरे द्वारा किया गया, ताकि Mangal Dosh के प्रभाव को दोहराया न जाए।
यदि आपकी कुंडली मिथुन लग्न की है और आप यह समझना चाहते हैं कि मंगल ग्रह की स्थिति आपके विवाह, दांपत्य सुख और रिश्तों को कैसे प्रभावित करती है, तो आप अपनी कुंडली का व्यक्तिगत विश्लेषण करवा सकते हैं।
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मंगल दोष के प्रभाव को नगण्य करने के नियम
अब तक हमने Manglik Dosh बनने के नियम और Mangal Dosh समाप्त होने के शास्त्रीय नियम विस्तार से समझे। लेकिन व्यवहारिक जीवन में ऐसा भी देखा जाता है कि कई लोग मांगलिक होते हुए भी सफल वैवाहिक जीवन जीते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कुछ परिस्थितियाँ और योग ऐसे बन जाते हैं, जिनसे मंगल दोष का प्रभाव नगण्य (Negligible) हो जाता है। नीचे दिए गए नियम शास्त्र + व्यावहारिक अनुभव—दोनों के आधार पर बताए जा रहे हैं, जिन्हें मैंने स्वयं अनेक कुंडलियों में घटित होते देखा है।
27 या उससे अधिक गुण मिलान
यदि विवाह के समय कुंडली मिलान में 27 गुण या उससे अधिक गुण प्राप्त हो रहे हों, तो मंगल दोष का प्रभाव काफी हद तक समाप्त हो जाता है।
- अधिक गुण मिलान का अर्थ है कि
- मानसिक सामंजस्य
- भावनात्मक तालमेल
- जीवन-दृष्टि की समानता पहले से मौजूद है।
- ऐसे में मंगल की उग्रता को समायोजित करने की क्षमता दंपति में स्वाभाविक रूप से आ जाती है।
👉 मेरे अनुभव में, 27+ गुण मिलान होने पर Mangal Dosh अक्सर व्यवहारिक स्तर पर प्रभाव नहीं दिखाता।
35 वर्ष या उससे अधिक आयु
यदि किसी व्यक्ति की आयु 35 वर्ष या उससे अधिक हो जाती है, तो मंगल दोष का प्रभाव सामान्यतः 10% के आसपास ही रह जाता है। यह बात मैंने केवल शास्त्रों से नहीं, बल्कि अनेक वास्तविक कुंडलियों के अध्ययन से अनुभव की है।
अनुभवजन्य सत्य:
Mangal Dosh का जो भी नकारात्मक प्रभाव होता है, वह प्रायः—
- 35 वर्ष से पहले
- या तो पूरी तरह प्रकट हो जाता है
- या अपने चरम तक पहुँच जाता है
35 वर्ष तक आते-आते अक्सर देखा गया है कि:
- व्यक्ति की शादी ही नहीं हुई होती
- या विवाह के बाद कोर्ट-कचहरी के मामले चल रहे होते हैं
- या विवाह विच्छेद हो चुका होता है
- या दूसरा विवाह हो चुका होता है
- या संतान संबंधी समस्याएँ (विशेषतः दूसरे संतान में बाधा) सामने आ चुकी होती हैं
इनमें से अधिकांश घटनाएँ 35 वर्ष से पहले घटित हो जाती हैं। इसके बाद Mangal Dosh की तीव्रता धीरे-धीरे कम हो जाती है।
लेकिन क्या हर 35+ व्यक्ति सुरक्षित होता है?
यहाँ एक अत्यंत आवश्यक बात समझना ज़रूरी है—
👉 हर 35+ आयु का व्यक्ति Mangal Dosh से पूर्णतः मुक्त हो जाए—यह आवश्यक नहीं। क्योंकि मंगल दोष के प्रभाव को तय करने में ये कारक भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं:
- लग्नेश की स्थिति और बल
- सप्तमेश की स्थिति और दृष्टि
- शुक्र की अवस्था (विशेषतः विवाह कारक होने के कारण)
- गुरु की भूमिका (परिवार और संरक्षण कारक)
मैंने ऐसी कुंडलियाँ भी देखी हैं जहाँ:
- सप्तम भाव अत्यंत दूषित होता है
- कई विवाह होते हैं
- लेकिन अनेक विवाहों के बावजूद भी स्थायी दांपत्य सुख प्राप्त नहीं हो पाता
इसलिए केवल उम्र या गुण मिलान देखकर निर्णय लेना भी उतना ही खतरनाक है, जितना केवल मंगल दोष देखकर डर जाना।
निष्कर्ष (Experience-Based Truth)
👉 Mangal Dosh हमेशा “on–off” की तरह काम नहीं करता।
👉 कई बार वह कमज़ोर, नगण्य या व्यवहारिक रूप से निष्क्रिय हो जाता है।
👉 सही निर्णय के लिए समग्र कुंडली विश्लेषण अनिवार्य है।
Mangal Dosh को समझना चाहिए, उससे डरना नहीं— लेकिन उसे नज़रअंदाज़ करना भी भारी भूल हो सकती है।
मांगलिक होने पर क्या करें?
Manglik Dosh की चर्चा तब वास्तविक रूप से शुरू होती है, जब व्यक्ति स्वयं मांगलिक हो। मंगल दोष का पता सामान्यतः कुंडली से लगाया जाता है, लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि व्यक्ति के पास अपनी जन्म-कुंडली या उसका सटीक डेटा उपलब्ध नहीं होता।
ऐसी स्थिति में यदि जीवन में मंगल दोष से संबंधित समस्याएँ— जैसे विवाह में बाधा, अत्यधिक विवाद, क्रोध, वैवाहिक अस्थिरता या संतान संबंधी कठिनाइयाँ—लगातार बनी हुई हों, तो यह माना जा सकता है कि Mangal Dosh की सक्रिय भूमिका हो सकती है। ऐसे में नीचे दी गई सावधानियाँ पूजा-पाठ से पहले अपनाई जाएँ, तो अनुभव के आधार पर मंगल दोष के दुष्प्रभावों में निश्चित रूप से कमी आती है।
1. मंगलवार को हमबिस्तर से परहेज़
मांगलिक व्यक्ति को मंगलवार के दिन या रात किसी भी स्थिति में हमबिस्तर (संभोग) से बचना चाहिए।
- मंगलवार मंगल ग्रह का दिन है
- इस दिन यौन ऊर्जा मंगल की उग्रता को और बढ़ा देती है
- जिससे वैवाहिक तनाव, चिड़चिड़ापन और विवाद की संभावना बढ़ती है
👉 यह सावधानी Mangal Dosh को शांत रखने में अत्यंत सहायक मानी जाती है।
2. क्रोध पर नियंत्रण और ऊर्जा का सही प्रयोग
Mangal Dosh का सबसे बड़ा संकेत अनियंत्रित गुस्सा होता है। मांगलिक व्यक्ति को चाहिए कि—
- अपने क्रोध को पहचानना सीखे
- उसे दबाए नहीं, बल्कि सकारात्मक दिशा में मोड़े
व्यावहारिक उपाय:
- क्रोध की ऊर्जा को कार्य, परिश्रम और अनुशासन में बदलें
- वाणी पर संयम रखें
- कम बोलें और अपने कार्य को बोलने दें
👉 मंगल की ऊर्जा काम में लगे तो उन्नति देती है, लेकिन वाणी में आए तो रिश्ते तोड़ देती है।
3. अशुद्ध और उत्तेजक खाद्य पदार्थों से परहेज़
मांगलिक व्यक्ति को ऐसे खाद्य पदार्थों से दूर रहना चाहिए—
- जिनका उद्देश्य केवल जिव्हा को संतुष्ट करना हो
- जो शरीर में उत्तेजना, गर्मी और असंतुलन बढ़ाते हों
👉 भोजन वही करें जो:
- पोषक हो
- शरीर को शीतलता दे
- और मानसिक संतुलन बनाए रखे
क्योंकि Mangal Dosh पेट और रक्त दोनों से गहराई से जुड़ा हुआ होता है।
4. रक्तदान — सबसे प्रभावी उपाय
मांगलिक व्यक्ति को वर्ष में कम-से-कम एक बार किसी जरूरतमंद या गरीब मरीज को रक्तदान अवश्य करना चाहिए। विशेषतः गर्भवती महिला हो तो सर्वोत्तम होता है।
👉 मेरे अनुभव में यह
Manglik Dosh को शांत करने का सबसे असरदार और स्थायी उपाय है।
- रक्त मंगल का कारक तत्व है
- जब हम रक्तदान करते हैं, तो मंगल की उग्र ऊर्जा का संतुलन बनता है
- और दोष का प्रभाव स्वतः कम हो जाता है
5. मांगलिक से ही विवाह (Arange Marriage में)
यदि विवाह अरेंज मैरिज के माध्यम से हो रहा है और निर्णय परिवार के हाथ में है, तो यह विशेष ध्यान रखना चाहिए कि—
👉 पार्टनर भी मांगलिक हो।
- मांगलिक + मांगलिक विवाह में मंगल दोष परस्पर संतुलित हो जाता है
- और उसका दुष्प्रभाव समाप्त हो जाता है
यह उपाय शास्त्रसम्मत भी है और व्यावहारिक भी।
6. वृक्ष विवाह (जब पार्टनर मांगलिक न हो)
कई बार ऐसा होता है कि मांगलिक व्यक्ति किसी गैर-मांगलिक से विवाह करना चाहता है— विशेषकर प्रेम विवाह के मामलों में।
ऐसी स्थिति में—
👉 मांगलिक व्यक्ति को विवाह से पूर्व
योग्य पुरोहित के मार्गदर्शन में पूर्ण विधि से पीपल वृक्ष से विवाह करना चाहिए। वृक्ष विवाह के बाद मांगलिक व्यक्ति को—
- दो पीपल के वृक्ष या फल व छाया देने वाले वृक्ष जैसे आम, अमरूद आदि लगाने चाहिए
- और जब तक वे वृक्ष युवावस्था की आयु पार न कर लें, तब तक उनकी नियमित देखभाल करनी चाहिए
👉 इसके पश्चात यदि देखभाल न भी की जाए, तो भी Manglik Dosh का दुष्परिणाम व्यवहारिक रूप से नहीं देखा जाता।
मांगलिक दोष के उपाय (Mangal Dosha Remedies)
कई बार ऐसा भी होता है कि व्यक्ति के पास अपनी या अपने पार्टनर की कुंडली का कोई भी सटीक विवरण उपलब्ध नहीं होता, लेकिन जीवन में चल रही परिस्थितियाँ—जैसे विवाह में देरी, बार-बार संबंधों में तनाव, क्रोध, अस्थिरता या वैवाहिक असफलता— यह संकेत देने लगती हैं कि Mangal Dosh सक्रिय हो सकता है।
ऐसी स्थिति में, यदि नीचे दिए गए उपाय नियमितता, श्रद्धा और अनुशासन के साथ किए जाएँ, तो अनुभव के आधार पर यह पाया गया है कि Manglik Dosh का प्रभाव धीरे-धीरे समाप्त या नगण्य हो जाता है।
1. मंगल बीज मंत्र का जाप (Daily Core Remedy)
प्रतिदिन प्रातः निम्न बीज मंत्र का 108 बार जाप करें—
“ॐ अं अंगारकाय नमः”
- यह मंत्र मंगल की उग्र ऊर्जा को संतुलित करता है
- क्रोध, आवेग और वैवाहिक टकराव को शांत करता है
- आत्मसंयम और साहस को सकारात्मक दिशा देता है
👉 यह उपाय हर मांगलिक व्यक्ति के लिए मूल आधार माना जाना चाहिए।
2. मंगलवार को मंगल दान (As Per Capacity)
प्रत्येक मंगलवार को कम-से-कम ₹50 मूल्य का मंगल दान करें। यदि आर्थिक स्थिति अनुमति न दे, तो अन्य सेवा-आधारित उपाय अपनाएँ।
मंगल से संबंधित दान वस्तुएँ:
- लाल वस्त्र
- तांबा
- मसूर की दाल
- मीठी रोटी
- गरीब को भोजन कराना
- बंदर को गुड़ और चने खिलाना
👉 दान का उद्देश्य दिखावा नहीं,
👉 बल्कि मंगल की उग्र ऊर्जा का विसर्जन है।
3. मंगलवार का व्रत (Light Discipline)
प्रत्येक मंगलवार को केवल जल और दूध ग्रहण करते हुए व्रत रखें।
- यह शरीर की उष्णता को नियंत्रित करता है
- मंगल दोष से जुड़ी उत्तेजना को शांत करता है
- और मन को संयमित बनाता है
👉 आवश्यकता अनुसार, स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए व्रत करें।
5. ब्रह्ममुहूर्त में “ॐ” बीज का ध्यान
प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त में कुछ समय के लिए केवल “ॐ” बीज अक्षर पर ध्यान करें।
- यह मन को स्थिर करता है
- आवेग और आक्रामकता को घटाता है
- और आत्मचेतना को जाग्रत करता है
6. गौ-सेवा और जीव-सेवा
- गाय को नियमित रूप से कुछ न कुछ खिलाना
- चींटी को आटा या मीठा देना
- और जीव-मात्र के प्रति करुणा रखना
👉 Mangal Dosh को शांत करने में सेवा सबसे गहरा उपाय है।
7. सबसे महत्वपूर्ण उपाय — जीवनसाथी का सम्मान
यह उपाय हर मंत्र और हर पूजा से ऊपर है।
- यदि जातक पुरुष है, तो विवाह के पहले दिन से पत्नी को लक्ष्मी के समान सम्मान, आदर और सुरक्षा दे।
- यदि जातक स्त्री है, तो पति को पूर्ण आदर, विश्वास और सहयोग प्रदान करे।
👉 Mangal Dosh का सबसे बड़ा उपचार है—
अहंकार का त्याग और सेवा-भाव का विकास।
8. ईश्वर में आस्था और आत्मबल
- जिस भी ईश्वर-रूप में आपकी श्रद्धा हो
- उसमें पूर्ण विश्वास और समर्पण रखें
क्योंकि—
- श्रद्धा मन को शांत करती है
- आत्मबल को मजबूत बनाती है
- और व्यक्ति को सही दिशा प्रदान करती है
✦ अंतिम सत्य (Most Important Conclusion)
👉 Manglik Dosh केवल ग्रहों का विषय नहीं है,
👉 यह व्यवहार, क्रोध, अहं और असंतुलन से जुड़ा हुआ विषय है।
यदि व्यक्ति—
- संयम
- सेवा
- सम्मान
- और श्रद्धा
को अपने जीवन में उतार ले,
तो Manglik Dosh अपने आप शांत हो जाता है, कई बार बिना किसी विशेष पूजा के भी।
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अंतिम संदेश
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धन तो आता है और चला जाता है, कहीं धूप तो कहीं छाया है; चलती-फिरती यही तो भगवान की माया है।
मोल है तो व्यक्ति के चरित्र का अगर यह गया जीवन में तो समझो व्यक्ति का सर्वस्व चला गया॥
------------अविरल बंशीवाल------------

